एक अनोखा प्रयास
हाल ही में आई एक खबर के मुताबिक राजस्थान के भरतपुर जिले में अब शादी के कार्ड में दूल्हा और दुल्हन की जन्मतिथि छपवाना अनिवार्य होगा. जिलाधिकारी के निर्देशानुसार अब सभी प्रिंटिंग प्रेस को निमंत्रण पत्र छापने से पहले दूल्हे और दुल्हन की जन्मतिथि के सत्यापित प्रमाणपत्र लेने होंगे. फिर दोनों की जन्म तिथि निमंत्रण पत्र पर छापनी होगी. ऐसा न करने पर प्रिंटिंग प्रेस सील कर दी जाएगी और प्रिंटिंग प्रेस मालिक के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्यवाही की जाएगी. निर्देश पालन की सत्यता जानने के लिए औचक छापे भी मारे जायेंगे. ये बात सर्वविदित है कि कानूनन अपराध होने के बावजूद हमारे देश में बाल विवाह खूब होते है. राजस्थान में तो खासकर अक्षय तृतीया के दिन ढेरो नाबालिग बच्चे विवाह बंधन में बंध जाते है. विवाह बंधन में बंधने वाले ज्यादातर बच्चे विवाह शब्द के साथ जुडी ज़िम्मेदारी से पूरी तरह से अनभिग्य होते है. इनके लिए विवाह का अर्थ मौज मस्ती, मिठाइयाँ और नए कपडे होता है. इन्हें कई बार तो ये भी नहीं पता होता की कच्ची उम्र में इनका ब्याह करके इनके माता पिता गुनाह कर रहे है और अगर कहीं पता भी होता है तो भी माता पिता भावनात्मक ब्लैकमेलिंग के जरिये बच्चों को विवाह करने के लिए मजबूर करते है.
इसी बात को देखते हुए जिलाधिकारी ने ये निर्देश ज़ारी किया है. हालाँकि ये निर्देश दो महीनो के लिए है लेकिन ज़रूरत पड़नेपर इसे बढाया भी जा सकता है. जिलाधिकारी द्वारा दिया गया ये निर्देश निश्चित रूप से अनोखा लेकिन सराहनीय प्रयास है. लेकिन जैसे हर बात का तोड़ निकाला जा सकता है वैसे ही इस आदेश के बावजूद लोग दूसरे हथकंडे अपनाकर अपने नाबालिग बच्चों की शादी करवा देंगे. जैसे वे निमंत्रण पार्ट छपवायेंगे ही नहीं या फिर गलत तरीके अपनाकर बच्चो का गलत प्रमाण पत्र सत्यापित करवा लेंगे.
चाइल्ड मेरिज एक्ट के अनुसार शादी के लिए, लड़के की वैध उम्र 21 वर्ष और लड़की की 18 वर्ष है. यदि किसी भी लड़के या लड़की की शादी इस उम्र से पहले कर दी जाती है तो वह बालिग़ होने के 2 वर्ष के भीतर अदालत में अर्जी देकर अपनी शादी अमान्य करार करा सकते हैं . यदि कोई बालिग़ व्यक्ति 18 वर्ष से कम उम्र की लड़की से शादी करता है तो इसके लिए उसे दो वर्ष की कड़ी सज़ा या 1 लाख रुपये जुर्माना या दोनों भी हो सकते है. जो व्यक्ति यह शादी करवाता है या इसे बढावा देता है, उसे भी यही सज़ा और जुर्माना हो सकता है. इसलिए ज़रूरत इस बात की है कि बाल विवाह रोकने के
लिए सख्त कदम उठाने के साथ साथ लोगों को, खासकर ग्रामीण अंचलों में रहने वाले लोगों को बाल विवाह से होने वाले नुकसान के बारे में बता कर जागरूक किया जाये जिससे लोग अपने बच्चों को (चाहे वह लड़का हो या लड़की) बोझ समझ कर जल्दी से जल्दी ब्याहने की बजाय उन्हें पढने लिखने का अवसर दे जिससे वह तरक्की कर सकें. साथ ही रोज़गार के नए अवसर पैदा किये जाए जिससे ये बच्चे जब युवा हो तो उन्हें रोज़गार की कोई कमीं न हो और वह अपनी गृहस्थी का बोझ उठाने में शारीरिक, मानसिक और आर्थिक रूप से पूरी तरह सक्षम हो सकें.
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