Thursday, July 26, 2012


आदर्श परिवार की परिभाषा
         पिछले दिनों ही ये खबर आई कि धरती पर रहने वाले हम लोगों का परिवार बढ़कर 7 अरब हो गया है. ये चर्चा  से ज्यादा चिंता का विषय है. हम दिन पर दिन बढ़ते ही जा रहे है. इसके कारण कई  हो सकते है जैसे चिकित्सा  के क्षेत्र में हुई उन्नति की वजह से जन्म दर में इजाफा और मृत्यु दर में आई कमी. इस विषय को लेकर  कभी जब अपने आस पास   नज़र दौड़ाती हूँ तो देखती हूँ  कि हमारे बुजुर्गो के अमूमन सात  या आठ  बच्चे है. जब वे बच्चे बड़े हुए तो हर किसी की शादी हुई,  एक से दो  हुए और इस तरह से हर बच्चे का अपना परिवार बना. इस परिवार में अमूमन चार बच्चों की बढ़ोतरी हुई जिसकी वजह से फिर  हर  बच्चे का परिवार छह  लोगों का  परिवार बना. फिर बड़े  होने पर उन चार बच्चों की भी शादी हुई जिससे हर एक बच्चे का परिवार फिर बढ़ा. अब तक उन सबसे बड़े माता पिता के आठ बच्चो वाला परिवार पीढ़ी दर पीढ़ी बढ़ कर एक पूरा कुनबा बन चुका था. लेकिन इस नयी पीढ़ी के लोग बढती जनसँख्या को लेकर जागरूक हो चुके थे तो उन्होंने अपने परिवार में बच्चों की संख्या दो तक ही सिमित रखी जिससे एक व्यक्ति  का परिवार अब छह   की जगह चार लोगों का हुआ.
  यहाँ बात थोड़ी अलग है. अब उन माता पिता की ये दो संतानें यदि एक लड़का और एक लड़की यानी भाई बहन है तो ये माना जाता है कि बहन की शादी  होने के बाद वह जिस परिवार में जाएगीउसकी ही वंश बेल बढाएगी. और बेटा  बहूँ लायेगा, जिससे हमारे घर का वंश आगे बढेगा. और अगर कहीं ये दो संताने दो बेटियाँ है तो पारिवारिकसामाजिक और कभी कभी माता पिता के खुद के मानसिक दबाव के कारण वे तीसरी संतान की भी तयारी कर लेते है कि  इस बार तो मेडिकल साइंस की मदद से तो बेटा पैदा हो ही जायेगा. अब तो मैंने ऐसे भी देखा है कि कई बार अगर दोनो संतान बेटे है तो भी कई माता पिता बेटी की आस में  तीसरी  संतान उत्पन्न कर लेते है. इसके पीछे तर्क होता है कि अगर बहन नहीं होगी तो त्यौहार पर दोनों  बेटों  को राखी कौन बांधेगा और फिर हर शुभ अवसर पर बहन की आवशकता तो होती ही है. अब तक टी वी पर आने वालो धारावाहिकों और विज्ञापनों में भी आदर्श परिवार  'हम दो हमारे दो' यानी माता पिता, एक पुत्र और एक पुत्री के रूप में ही  दिखाया जाता था. लेकिन अब कुछ धारावाहिकों में ये रूप कुछ बदला बदला सा है. जैसे  टी. वी पर प्रसारित होने वाले धारावाहिक 'बड़े अच्छे लगते है' में विक्रम और नेहा के तीन बच्चे दिखाए गए है. वहीँ  एक और धारावाहिक 'परवरिशके प्रोमो  में एक परिवार में दो तो  दूसरे  परिवार में तीन  संताने दिखाई जा रहीं है. इन सबको देखकर समझना मुश्किल है कि आदर्श परिवार की असल परिभाषा क्या है?

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