Wednesday, July 25, 2012

aam aadmi


 आम आदमी होने का दर्द


                  बचपन में जब चिलचिलाती गर्मी में हमारे सरकारी स्कूल के सरकारी नल में पानी नहीं आता था तो हमारी  टीचर   को स्टाफ रूम में रखे ठन्डे पानी के जग से  ठंडा पानी पीते देखकर कुछ शरारती बच्चे कहते कि मैडम तो V.I.P हैं और हम आम जनता. तब पहली बार V.I.P  और आम जनता के बीच का फर्क मैंने जाना था. उसके बाद तो आम जनता होने का खामियाजा मैंने कदम कदम पर  भुगता है.
                            कभी किसी बड़े मंदिर में  ईश्वर के दर्शनों  की आस लिए मैं गर्मी में दो घंटे से भक्तो की लाइन मे खड़ी  पसीने पसीने  हो  रही हूँ   कि तभी देखती  हूँ  कि चेहरे पर विजयी मुस्कान लिए पुलिस दल बल के साथ  एक साहब अपने परिवार समेत  आये और बिना लाइन में लगे मिनटों मे  भगवान् के दर्शन करके चले गए. और मैं  देखती  रह गई. तभी किसी ने फिकरा कसा कि ज़रूर कोई बड़े सरकारी अफसर होंगे. भगवान् के दर्शन करने नहीं बल्कि भगवान् को दर्शन देने आये थेभाई इन V.I.P   लोगों का समय तो  बहुत कीमती है. हम आम लोगों का क्या, हमारे पास तो टाइम ही टाइम है.
                                     कुछ दिन बाद फिर किसी ज़रूरी काम से  घर से बाहर गई तो 2 घंटे जाम  में फँसी रही. जाम का कारण था   V.I.P मूवमेंट   जिसकी वजह से कई सड़के बंद थी. किसी तरह से लम्बा  alternative रूट लेकर , फ़ालतू पेट्रोल और टाइम खर्च करके अपनी मंजिल पर  पहुंची तो मेरा काम भी नहीं हो पाया क्योकि में काफी लेट हो गयी थी. बिना किसी कसूर के मेरा समय और पैसा दोनों बर्बाद हुए
                                    सरकार ने फंड्स  कम होने की  दुहाई देकर पट्रोल और बाकी ज़रूरी चीज़ों के दाम बढ़ा  दिए. यहाँ फिर आम आदमी पिसा क्योंकि उसे पैसा अपनी जेब से देना है. सरकारी गाड़ी में घूमने   वाले  V.I.P   को  किस बात की  चिंता क्योंकि उसकी गाडी में तो पेट्रोल भी सरकारी है और रसोई गैस सिलेंडर में गैस भी सरकार के ही पैसों की  हैंपर ये सरकारी पैसा भी तो आम आदमी का ही पैसा है जो वो सरकार को टेक्स के रूप में देता है.
                     एक बानगी और देखिये. कभी किसी हाई वे पर बने किसी टोल  प्लाज़ा पर जाइये. हर टोल प्लाज़ा पर एक बड़ा सा बोर्ड लगा है  जिस पर लिखा रहता है  कि किस किस V.I.P से टोल  टैक्स चार्ज नहीं किया जायेगा. यानि V.I.P होने का कितना फायदा है. कुछ दिन पहले जब अमृतसर में वाघा बोर्डर गयी तो पता चला कि यहाँ आने से पहले अगर  कोई सोर्स लगा कर पास ले लिए जाए तो आप बड़े आराम से कुर्सियों पर बैठकर बिलकुल पास से सारी  सरेमनी  देख सकते है पर अगर आप आम आदमी है तो खचाखच भरे स्टेडियम  मे  बस जैसे भी करके घुस जाइये और जो  और जितना दिख सके, देख लीजिये. कुल मिलकर मैंने तो यही देखा कि यदि आप V.I.P  या उसके रिश्तेदार है तो आपकी बल्ले बल्ले है और अगर आप आम आदमी है तो आपका भगवान् ही मालिक है
                                                                

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