Thursday, June 14, 2018

four liners

four liners


परिस्थितियों के साथ मुझे ढलना नही आता यारों,
समय के साथ मुझे चलना नहीं आता यारों।
वो और हैं जो बदल जाते हैं वक़्त पड़ने पर,
ज़रूरत में दोस्तों से मुझे, नज़र बदलना, नहीं आता यारों।।
मन आईने सा साफ है मेरा, इस पर मैल न चढ़ने दिया है,
मुसीबत में किसी को देखकर, पीठ फेरना नही आता यारों।।
#parul

बेरुखी है ये तुम्हारी, पर मन मानने को तैयार नहीं।
नाज़ुक भोला मन है मेरा, क्या करु जो होशियार नहीं।
#parul

ख्वाहिशें हैं इस दिल में, ये जानती तो थी मैं।
पर समंदर देखकर उनका अंदाजा आया।
#parul

एक तुम ही हो,जो बिना कुछ बोले समझते हो।
वर्ना तो सब कहते है कि तुम बोलती बहुत हो।
#parul

तुम
वो तुम और तुम्हारा प्यार,
वो हम दोनों का साथ।
वो दिल की गहराइयों में उतर जाना,
प्यार से मुझे सहलाना।
बहुत कुछ है याद करने को,
क्या क्या याद करूं मैं।।
#parul


जब भी ये दिल उदास होता है। जीवन जीवटता लिए आसपास होता है।
#parul


अगर कुछ न कर सकें, तो डूबा देंगे कश्ती.
साहिल की कसम, हम मिन्नतें तूफानों से न करेंगे.
#parul


फूलों जैसे तो हैं हम भी,
आज हैं, कल चले जायेंगे।
फिर भी यकीन है खुद पर,
जब तक रहेंगे, बगिया को महकायेंगे।
#parul


जैसे तराश देता है पत्थर से हीरा कोई,
तुमने वैसे ही तराश दिया जानेमन मुझे।
#पारुल

भूल जाती हूँ ये दुनिया,
 जब बाँहों में तुम्हारी होती हूँ।
दूर होती हूँ सबसे,
जब पास तुम्हारे होती हूँ।
#पारुल

चंदन से हो तुम,
जब भी पास आते हो,
महक मैं जाती हूँ।
#पारुल

इतने कमज़ोर नहीं जो डर जायेंगे,
ये कभी ना होगा कि मर जायेंगे।
जितने भी इम्तेहान लेना चाहे
तू ले अ ज़िंदगी ,
देखना, हर इम्तेहान में अव्वल आएंगे।
#पारुल

मै मुमताज़ नहीं जो ख्वाइश पूरी होते देखने के लिए मर जाऊं,
मैं तो लक्ष्मीबाई हूँ , जो हक़ के लिए जीते जी लड़ जाऊं।
#पारुल

ज़ुल्फ़ों की घनी छांव, ये गालों की हंसी धूप,
ज़िंदा है तुम्हारे प्यार से जानम ये मेरा रूप।
क्या क्या ना मेरे प्यार को जानम दिया तुमने,
एक बूँद की प्यासी थी, समंदर दिया तुमने।
#पारुल

तुम्हारे प्यार में जान भी दे सकते हैं हम,
पर जान भी कैसे दें, जान भी तुम ही हो
सच तुम्हारी क़सम।
#पारुल

पुछा मैंने किसी से, ज़िन्दगी की दौड़ में जीतने का तरीक़ा क्या है ?
जवाब मिला
जहाँ तुम खड़े हो,जानते हो वही तो अव्वल नंबर है।
#पारुल

कैसे कैसे इम्तहान लेती है ज़िन्दगी
कभी हंसती तो कभी रुलाती है ज़िन्दगी।
सोचते ही रह जाते है हम,
और अपने रंग दिखा जाती है ज़िन्दगी।
#पारुल

शाम के धुँधलके में,
एक चेहरा सा दिखता है।
कहीं वो आप तो नहीं,
न जाने क्यों ऐसा लगता है।
#पारुल

ओस से भीगे पत्तों पर,
चमकीली गरम रेतों पर।
ज़िन्दगी हर जगह है दोस्तों,
जहाँ देखों वहां पर।
#पारुल

कभी ख्वाब में देखते थे जिसे,
आज हक़ीक़त बन सामने है वो।
डर लगता है छूने से उसे,
गर ख्वाब हुआ और टूट गया तो।
#पारुल

मुस्कराते हुए फूलों की तरह,
झिलमिलाते हुए तारों की तरह।
ज़िन्दगी में आए तुम,
सुबह के उजालो की तरह।
#पारुल

अ दोस्त तेरी दोस्ती की कीमत
कुछ इस तरह अदा हम करेंगे।
तेरे दुखों, मेरे सुखों की अगला बदली कर दे रब,
बस यही दुआ करेंगे।   
#पारुल

माना कि बहुत अच्छे लगते हैं आपको हम,
पर इतना भी अच्छा न बनाओ की बिगड़ जाएँ हम।
#पारुल

आज आसमान का रंग कितना गहरा है,
उस पर बादलों का जो पहरा है।
चंद लम्हों में बरस कर हट जायेंगे बादल,
देखों आसमान भी यही कह रहा है।
#पारुल 

उजाला आया अँधेरा गया, देखो जादू देखो।
सूरज आया चाँद गया, देखों जादू देखों।
हिम्मत और बुलंद इरादे हुए ,
परेशानी और डर गया,
देखो जादू देखो।
#पारुल

 कोसते थे जिस क़िस्मत को कल तक,
करते हैं नाज़ आज उसी पर।
सोचते हैं आप जैसा दोस्त न देती क़िस्मत अगर
पत्थर समझ खुद को, पड़े रहते ज़मी पर
ना उड़ते आसमान में, न हाथ बढ़ाते तारों की तरफ। 
#पारुल

ज़िन्दगी खिल गयी, तुमसे मिलने के बाद
फूल महके, तुमसे मिलने के बाद।
रंगो से भर दी सूनी ज़िन्दगी तुमने,
ज़िन्दगी मिल गयी तुमसे मिलने के बाद।         
#पारुल

अभी तक तो इतना ही जानते थे,
सिर्फ तारे ही उतारते है ज़मीं पर।
आपसे मिले तो पता चला,
अब तो चाँद भी उतरने लगा हैं ज़मीं पर।
#पारुल

तुम खुश रहो, सलामत रहो, ये दुआ है हमारी,
रब तुम पर लुटा दे अपनी नैमते सारी।     
जब भी अपनी नज़रें उठाओगे,
हमारे हाथों को दुआ में उठा पाओगे।
#पारुल

कर दी बयान आँखों ने वो दास्ताँ,
जो होंठों ने कभी ना कही थी।
कह गयी सारी बातें मेहंदी की वि रंगत,
जो अब तक मेरे दिल में कहीं छुपी थी।
#पारुल

तेरे बिना मैं जी लूँ, ये मेरे बस की बात नहीं।
ये ज़हर मैं पी लूँ, ये मेरे बस की बात नहीं।
तू मुझे भूल जाएँ, ये तेरे बस में हो शायद।
मैं तुझे भूल कर जी लू, ये मेरे बस की बात नहीं।
#पारुल    
 

      

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