Thursday, June 14, 2018

arsa beeta

 अर्सा बीता
अर्सा बीता  छत पर गए हुए,
अर्सा बीता ये सुख लिए हुए।
हवाएं कूलर से आ जाती हैं ,
तो गर्मी हीटर ले आता है,
गोरी का चेहरा भी अब,
फेसबुक पर दिख जाता है।
अरसा बीता छत......
अचार अब सूखते नहीं,
बाजार डिब्बे में जो दे देता है।
गीले कपड़े अब छत पर जाते नहीं,
वाशिंग मशीन जो उन्हें सुखा देता है।
अर्सा बीता छत........
चाँद अब छज्जे से ही दिख जाता है,
तो पतंग ले बच्चा अब पार्क में भाग जाता है।
छतों से कटोरियाँ अब पड़ोस में जाती नहीं,
एक फ्लोर ही तो है जो अब अपना कहलाता है।
छत पर खड़े गुफ्तगू किये अब ज़माना हो गया,
वक़्त किसके पास रहा जो छत पर चढ़ आता है।
अरसा बीता छत ......
वो पानी की टंकी में पानी चैक करना
बीते ज़माने की बात है।
वो छत पर टीवी एंटीना चैक करना, 
 अब बहुत पुरानी याद है।
अर्सा बीता छत......... 
अब तो छत पर केबल वाला और लिफ्टमैन ही चढ़ते हैं,
हम तो बस अब कमरों और छज्जो में ही बसर करते हैं।
अर्सा बीता छत पर गए हुए,
अरसा बीता ये सुख लिए हुए।
#पारुल
14.6.18

No comments:

Post a Comment