Sunday, December 24, 2017

कहाँ गयीं वो उलझने

कॉलेज लाइफ पर लिखी मेरी कविता:

कहाँ गयी वो उलझनें
जो कॉलेज में हुआ करती थीं।
जब अधूरा असाइनमेंट हाथ में लिए
दोस्तों से पूछा करते थे
जब अटेंडेंस पूरी करने को
टीचर से रिक्वेस्ट करते थे।
कहाँ गयी वो उलझनें
जो कॉलेज में हुआ करती थीं।
जब प्रॉक्सी लगाने के लिए
कोई दोस्त कह दिया करता था।
मारे टेंशन के उस पल तो
कुछ भी समझ न आता था।
कहाँ गयी वो उलझनें
जो कॉलेज में हुआ करती थीं।
वो मास बंक जब होता था
और  टीचर देख लेता था।
उस पल तो जैसे राम कसम
कलेजा मुंह को आता था।
कहाँ गयी वो उलझनें
जो कॉलेज में हुआ करती थीं।
वो कॉलेज से पिक्चर जाना
और हॉल में पडोसी का मिल जाना।
वो यू स्पेशल में घर जाना
वो स्टीफंस वाले लड़के का, फिर भी बस में न दिखना।
कहाँ गयी वो उलझनें
जो कॉलेज में हुआ करती थीं।
वो टीचर का ओरल टेस्ट लेना
और इंग्लिश में आंसर न दे पाना।
वो दोस्तों का बर्थडे  ट्रीट लेना
और पॉकेट मनी कम पड़ जाना।
कहाँ गयी वो उलझनें
जो कॉलेज में हुआ करती थीं।
वो पहली बार लिफ्ट माँगना
और गाडी का सच में रुक जाना
वो कॉलेज जाना मिस न करना
पर अचानक बारिश का आना
कहाँ गयी वो उलझनें
जो कॉलेज में हुआ करती थीं।
वो टेस्ट में उत्तर का ना आना
उस पर टीचर का घूरे जाना
वो केन्टीन में मस्ती करने जाना
और समोसों का खतम हो जाना ।
कहाँ गयी वो उलझनें
जो कॉलेज में हुआ करती थीं।
वो क्लासमेट के पास लाइब्रेरी की किताब
पर मुझे किताब का ना मिलना
वो कॉलेज फेस्ट के टाइम पर
पास नए कपडे ना होना
कहाँ गयी वो उलझनें
जो कॉलेज में हुआ करती थीं।
कितनी प्यारी थी वो उलझनें
जो झट सुलझ जाया करती थी।
अब तो बस टेंशन है
जो मार गिराया करती है।
#parul

जाने तुममे क्या बात है

जाने तुममें क्या बात है
बात बात पर याद आते हो,
जाने तुममें क्या बात है।
मन में बसते जाते हो,
जाने तुममें क्या बात है।।

मेरे शब्दों में बुन जाते हो,
जाने तुममें क्या बात है।।
मेरी बातों में छा जाते हो,
जाने तुममें क्या बात है।।

मेरी आँखों में दिख जाते हो,
जाने तुममें क्या बात है।
मेरे गीत तुम बन जाते हो,
जाने तुममें क्या बात है।।
#parul

मेरी साँसों को महकाते हो,
जाने तुममें क्या बात है।
मैं मैं नहीं तुम बन जाते हो,
जाने तुममें क्या बात है।।
#parul

तुम

तुम
वो तुम और तुम्हारा प्यार,
वो हम दोनों का साथ।
वो दिल की गहराइयों में उतर जाना,
प्यार से मुझे सहलाना।
बहुत कुछ है याद करने को,
क्या क्या याद करूं मैं।।
#parul

yaron

यारों
परिस्थितियों के साथ मुझे ढलना नही आता यारों,
समय के साथ मुझे चलना नहीं आता यारों।
वो और हैं जो बदल जाते हैं वक़्त पड़ने पर,
ज़रूरत में दोस्तों से मुझे, नज़र बदलना, नहीं आता यारों।।
मन आईने सा साफ है मेरा, इस पर मैल न चढ़ने दिया है,
मुसीबत में किसी को देखकर, पीठ फेरना नही आता यारों।।
#parul