Tuesday, March 25, 2014

social media me self regulation ki darkar


  सोशल मीडिया में सेल्फ रेगुलेशन की दरकार
टी वी पर आने वाले आमिर खान के शो सत्यमेव जयते को लेकर पिछले दिनों कुछ मेसेज वट्स एप, ट्विटर और फेस बुक पर सर्कुलेट हो रहे थे जिनमें लिखा था कि शो में मिली डोनेशन का इस्तेमाल एक खास धर्म के लोगों के हित में इस्तेमाल किया जा रहा है। ये मेसेज सोशल मीडिया पर इतने सर्कुलेट हुए कि इस बारे में आमिर खान को खुद मीडिया में आकर बात साफ़ करनी पड़ी। और इस बाबत उन्होंने मुम्बई पुलिस में शिकायत भी दर्ज़ करवाई हैं। इस तरह का ये कोई नया मामला नहीं है।  इससे पहले भी इस तरह के झूठे मेसेजिस के दुष्परिणाम सामने चुके है।
इस बात से कोई इंकार नहीं है मीडिया हम सबकी ज़िन्दगी का अहम् अंग है। इसे लोकतंत्र का चौथा खम्बा कहा जाता है। रेडियो, टेलीविजन और अख़बार जैसे हमारी ज़िन्दगी का अहम् हिस्सा हैं, लेकिन पिछले कुछ समय से टेक्नोलोजी में आये ज़बरदस्त बदलाव ने स्मार्टफोन के ज़रिये जैसे सारी दुनिया हमारे अंगूठे के एक इशारे के नीचे ला दी है। हमें एक दूसरे के इतना नज़दीक ला दिया है कि हम कोई भी मेसेज, फ़ोटो या विडियो एक दूसरे के ज़रिये कुछ मिनटों में पूरी दुनिया में फैला सकते हैं। रोजाना लॉन्च होते नए नए एप हमारी ज़िन्दगी का जैसे हिस्सा बन चुके है। लेकिन इन ऍप्स को  और इनके ज़रिये शेयर होने वाली इन्फोर्मेशन के प्रभाव को हमने शायद बहुत हल्के तौर पर लिया हुआ है।
अभी ज्यादा दिन नहीं हुए, पिछले साल अगस्त में नॉर्थ ईस्ट के छात्रों का बंगलुरु से अचानक पलायन इन्ही सोशल नेटवर्किंग साइट्स और वट्स एप पर फैले झूठे मेसेजिस का ही नतीज़ा था।  इसी तरह केदारनाथ में आयी त्रासदी का झूठा विडियो पिछले साल खूब सर्कुलेट हुआ जिसे ध्यान से देखने पर पता चल जाता है कि ये विडियो झूठा है। इसी तरह के ऐसे अनेक किस्से है जिनसे हम आये दिन दो चार होते है और कई बार इस तरह के मेसेजिस, इमेजेस और विडियो देखकर बिना उनकी विश्वसनीयता देखे परखे हम उन्हें फॉरवर्ड कर देते है।
एक अनुमान के अनुसार दुनिया में 1.26 बिलयन फेसबुक यूज़र हैं और हर रोज़ फेसबुक पर साढ़े तीन सौ बिलियन से ज्यादा फ़ोटो अपलोड होते हैं।  इसी तरह वट्स एप के 417 मिलियन यूसर्स है और वट्स एप पर रोजाना 27  बिलियन से भी ज्यादा मेसेजस सरकुलेट होते है।  इसी क्रम में ट्विटर भी पीछे नहीं है।  इन आंकड़ों से ये अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि सोशल मीडिया और मोबाइल मीडिया आज की तारीख में सूचनाएं फ़ैलाने का सबसे तेज़ माध्यम बनता जा रहा है। बेशक ये अच्छी बात है कि टेक्नोलोजी की वजह से समय पर मिलने वाली सूचनाओं से हमारे  समय और श्रम दोनों की ही बचत होती है लेकिन  इसमें ध्यान रखने योग्य बात ये भी है इनके कंटेंट की  विश्वसनीयता संदेहास्पद होती है।
 सोशल मीडिया और मोबाइल मीडिया पर जो मेसेज सर्क्युलेट होते है उनका असर सिर्फ उसे पढ़ने वाले पर ही नहीं होता बल्कि उसके साथ रहने वाले अन्य लोगों पर भी होता है क्योंकि वह व्यक्ति फिर मौखिक रूप से उस मेसेज को अन्य कई लोगों तक पहुंचता है। सोशल  और मोबाइल मीडिया  को छोड़कर अन्य किसी भी मीडिया द्वारा जब कोई सूचना दी जाती है तो उसकी विश्वसनीयता काफी हद तक यकीन किया जाता है और अगर किसी मीडिया हाउस द्वारा कोई खबर गलत दी भी जाती है तो मीडिया हाउस उसके प्रति जवाबदेह होता है। लेकिन मोबाइल मीडिया और सोशल मीडिया पर खबर के सोर्स का अक्सर कोई अता पता नहीं होता।
ऐसे में प्रश्न ये उठता है कि इसका निदान क्या हो ? तो इसका एक बहुत ही सरल सा निदान है और वो है जागरूकता। यदि सोशल मीडिया और मोबाइल मीडिया का हर यूज़र जागरूक होगा तो वह अपने पास आये किसी भी सदेहास्पद मेसेज, फ़ोटो या विडियो को कभी फॉरवर्ड नहीं करेगा और इस तरह के कंटेंट भेजने वाले को भी इसके लिए सचेत करेगा। यदि ऐसा होगा तो इस तरह के कंटेंट का सर्कुलेट होना स्वतः ही रुक जायेगा। अतः सेल्फ रेगुलेशन के द्वारा ही इस परेशानी का उपचार सम्भव है।
                                                                                                                 


1 comment:

  1. बहुत अच्छी आर्टिकल आपने लिखा, ऐसे हि लागातार ज़ारी रखे ! गुड लक !

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