Saturday, July 20, 2013

kya jaanu

क्या जानूं  

क्या जानूं  तुम कौन हो मेरे,
       मन में जगह बनाते हो।
क्या जानूं  तुम कौन हो मेरे,
       मुझमें बसते जाते हो।
क्या जानूं तुम कौन हो मेरे,
       कैसा रिश्ता बनाया है,
क्या जानूं  तुम कौन हो मेरे,
       सब कुछ तुममे पाया है।
क्या जानूं तुम कौन हो मेरे,
       सपनो में तुम आते हो,
क्या जानूं तुम कौन हो मेरे,
        आधी रात जागते हो।
क्या जानूं तुम कौन हो मेरे,
        धड़कन में बस जाते हो।
क्या जानूं तुम कौन हो मेरे, 
          सासें महका जाते हो। 
नहीं जानती कौन हो मेरे, 
          इतना तो बतला दो तुम।
कौन सा बंधन जुड़ा है तुमसे,
          इतना तो समझा दो तुम।  
                                      पारुल 

tumhe

तुम्हें 

तुम्हें जाने कितनी बार जिया है मैंने, 
                 अपनी साँसों में महसूस किया है मैंने।
कांपते होठों के अहसास को, 
            तुम्हारे प्यार के विश्वास को।
 अपनी पलकों पर महसूस किया है मैंने, 
             तुम्हें जाने कितनी बार जिया है मैंने।।
तुम्हारे हाथों की नरमाई  को, 
         तुम्हारी साँसों को गरमाई को।
अपने हाथो पर महसूस किया है मैंने,
          तुम्हें जाने कितनी बार जिया है मैंने।।
तुम्हारी आँखों में अपने लिए इंतज़ार को 
           तुम्हारे दिल में अपने लिए प्यार को। 
अपने दिल में महसूस किया है मैंने,
           तुम्हें जाने कितनी बार जिया है मैंने।।
तुम्हारे प्यार से भरे दिल के समुन्द्र को,
            तुम्हे, तुम्हारे वजूद को।
अपने साथ परछाई सा महसूस किया है मैंने,
            तुम्हें जाने कितनी बार जिया है मैंने।।
भर उठता है ये मन ख़ुशी से,
            जब ये अहसास होता है कि  तुम्हे।
अपनी हर धड़कन में महसूस किया है मैंने,
             तुम्हें जाने कितनी बार जिया है मैंने।।
                                                                पारुल 

dekhti hu

देखती हूँ 

देखती  हूँ जब भी किनारे तोडती नदी को,
     सोचती हूँ  क्यों तोडा नहीं मैंने मन की सीमाओं को।
छूने देती इसे आसमान की ऊँचाइयों को,
     जैसे नदी छूती  है अपनी गहराइयों को।
उछलता कूदता जाता तू अपनी डगर,
    जैसे जाती है नदी अपने सफ़र।
और अंत में समा जाती है सागर की बाहों में,
     तू भी चला आता यूँही मेरी पनाहों में 
                                                 पारुल