Thursday, August 2, 2012


        त्योहारों के बदलते मायने                 

                              यू तो हम साल भर त्यौहार मानते है पर कहा जाता है कि सावन की तीज अपने साथ ढेर सारे  त्योहारों की  सौगात  लेकर आती है. इसी कड़ी में आज रक्षा बंधन का त्योहार है जो  भाई  बहन के पवित्र रिश्तें  का प्रतीक है. पर मैं महसूस करती हूँ कि समय के साथ इस त्यौहार के मायने और  इसे  मनाने का  तरीका  भी बदल रहा है. त्यौहार जो पहले जीवन में हर्ष और उल्लास भरने के साथ साथ परिवार के सभी लोगों के इकट्ठे  और साथ होने का बहाना भी होते थे.  वही  अब कई बार त्यौहार सिर्फ  एक जिम्मेवारी की तरह बस निभा भर दिए जाते है.  कई बार बहन को भाई का दिया हुआ शगुन पसंद नहीं आता तो कई बार भाई को बहन की लायी मिठाई कडवी लगने लगती है. 
अब राखी  के दिन  रक्षाबंधन पर आधारित पुराने फ़िल्मी गीत बजते सुनाई  नहीं देते. पुराने गीत इसलिए क्योंकि अब इस त्यौहार पर आधारित नए गीत तो बनते ही नहीं है. बड़ी बड़ी रंग बिरंगी  फोम  लगी और उस पर  मेरे भैया लिखी  राखी की  जगह अब नगों लगी पतली राखियों ने ले ली है. मिठाई की जगह चोकलेट और बिस्किट के डिब्बे  गए. क्या किया जाये, बाज़ार में मिलावटी  मिठाई जो मिल रही है.   राखी बंधाई का शगुन भी अब भाई  और बहन के स्टेटस के हिसाब से तय होता है. अब बहने  भी भाइयों के लिए घर पर पूरी कचौरी नहीं बनाती  बल्कि रक्षाबंधन का त्यौहार घर पर मना कर पूरा परिवार किसी  रेस्तरां में बैठकर खाना एन्जॉय करता है. यहाँ तक तो ठीक है. ज़माना बदल रहा है. समय की हर किसी के पास घोर कमी है इसलिए जिसमे सबको सहूलियत लगेत्योहार उसी तरह मनाना  चाहिए.  पर राखी  का मखौल उड़ाने  में टीवी शोज़ भी पीछे नहीं है. अक्सर इन दिनों में किसी भी टी. वी. शो में दिखाया जाता है कि लड़की राखी लेकर लड़के  के पीछे भागती है जबकि लड़का राखी नहीं बंधवाना  चाहता.
हर त्यौहार की एक गरिमा होती है. राखी के त्यौहार की भी अपनी गरिमा है. ये त्यौहार भाई बहन के रिश्ते की पवित्रता का प्रतीक है. राखी के कच्चे धागों से  भाई और  बहन के बीच का प्यार और भी पक्का होता है. ये त्यौहार न सिर्फ भाइयों को बहन के प्रति उनके कर्तव्य की याद दिलाता है बल्कि बहनों को भी अहसास करता  है उनके भाई सदा उनके साथ है.इसलिए रक्षाबंधन सही मायनो में तभी सार्थक है जब  हम इस त्यौहार की अहमियत को समझ कर इस त्यौहार को मनाये न कि सिर्फ परंपरा समझ कर इसका निर्वाह करें.    

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