Wednesday, August 15, 2012


  हमारा नाम: हमारी पहचान

                                         हाल ही में हुए एक दिलचस्प  सर्वे में पता चला कि अगर लिखने के लिए नया पेन दिया जाये तो उसे टेस्ट करने के लिए 97 % लोग उससे अपना नाम लिख कर देखते हैं. ये नतीजे साफ़ तौर पर दर्शाते हैं कि हम सभी अपने नाम को  कितना प्यार करते हैं. ये अपने नाम के प्रति मोह ही तो हैं कि यदि कोई हमें गलत नाम से पुकारता है तो हम फ़ौरन उसे टोक कर अपना सही नाम बताते हैं.  बड़ो की तो बात ही छोडिये, अगर हम एक छोटे से बच्चे का नाम भी गलत तरीके से उच्चारित  करते हैं तो वह फ़ौरन हमें कर्रेक्ट  करता है.
                       हमें  हमारा  नाम हम खुद नहीं देतेये तो सदा हमें दूसरो के द्वारा  दिया जाता  हैजब बच्चा  पैदा होता हैं तो उसकी अपनी  कोई  आइडेन्टिटी  नहीं होतीपरिवारवालों के द्वारा उसका  नाम बार बार पुकारे  जाने पर ही वह समझ पाता है कि इस शब्द यानी मेरे  नाम द्वारा ही मेरी पहचान हैहमारा नाम ही हमारे और दुनिया के बीच परिचय की पहली सीढ़ी होता है. तो फिर हम अपने नाम से प्यार क्यों करें
                      नाम को लेने के भी अलग अलग तरीके होते है. माँ के नाम लेकर पुकारने में हमे माँ की ममता का भी अहसास होता है जबकि पिता द्वारा नाम पुकारे जाने पर हमे  उनके  हमारे प्रति स्नेह की अनुभूति होती है. स्कूल टीचर द्वारा पुकारे जाने पर हमे उस टीचर के प्रति भय मिश्रित सम्मान की भावना आती है वहीँ  प्रियतम द्वारा हमारा नाम लेना कानो में मिठास घोल जाता है
                जब हम किसी से मिलते है तो अपने आप को इंट्रोड्यूस करते समय सबसे पहले अपना नाम बोलते हैं और अपने बारे में बाकी जानकारी उसके बाद  देते हैकिसी से बातचीत शुरू करने में भी सबसे पहले टूल के रूप में हमारा नाम ही आता है. किसी से मिलने के बाद भले ही हम उसके बारे में और सब कुछ भूल जाये परन्तु उसका नाम  लम्बे समय तक हमें याद रहता है.  
                   अक्सर जब हमें कभी कोई हमनाम व्यक्ति कहीं मिल जाता है तो वह हमें कहीं कहीं अपना सा लगता है और हम काफी लम्बे समय तक उसे  याद रखते  हैं  क्योंकि  एक जैसा नाम होने के कारण हम उससे एक अलग प्रकार का जुड़ाव महसूस करते हैं.
                   कभी किसी से  सामान्य बातचीत करते समय जब हम उस व्यक्ति का नाम पुकार कर उससे बातचीत करते हैं तो वह हमारी बात में ज्यादा इंटेरेस्ट लेता है. उसका कारण हैं कि नाम से पुकारने से सामने वाले व्यक्ति के मस्तिष्क को यह सन्देश मिलता है कि यह व्यक्ति मुझ ही से बात कर रहा है
                            विलियम शेक्सपियर की एक मशहूर लाइन है कि What 's  in  a name ? यानी नाम में क्या रखा है? वो शायद अपनी जगह सही  है परन्तु हमारा नाम हम सबके लिए बहुत मायने रखता हैअच्छा या बुरा काम  करने पर  हमारा नाम ही तो मशहूर या बदनाम होता है. सदियों से माता पिता अपने बच्चों से यहीं चाहते आये हैं कि वे बड़े होकर उनका नाम रोशन करें. तो साफ़ है कि नाम में बहुत कुछ रखा है
                            कई बार पेरेंट्स बिना सोचे समझे  अपने बच्चों का नाम उस समय के  किसी पॉपुलर फिल्म स्टार या खिलाडी के नाम पर रख देते हैबच्चे का नाम रखते समय तीन  बातों पर ज़रूर ध्यान देना चाहिए. पहला कि बच्चे का  जो नाम हम रखने जा रहे हैं, उस नाम का मतलब क्या है, दूसरा कि उसका उच्चारण आसान हो और तीसरा, वह नाम बच्चे के बड़े होने पर उसकी पर्सनेलिटी को सूट करे, क्योंकि व्यक्ति  का नामताउम्र उसके साथ रहता है.  
                         अगर ज्योतिषियों की  माने तो हमारा नाम हमारी पर्सनेलिटी ही नहीं हमारे भाग्य पर भी असर डालता है तभी तो आजकल फेमस लोग ही नहीं बल्कि आम लोग भी अपनी किस्मत चमकाने के लिए, ज्योतिषियों की राय लेकर अपने नाम की स्पेल्लिंग में कुछ  अक्षर  या तो बढ़ा घटा लेते है या फिर अपना नाम कुछ अलग तरीके से लिखते हैं.
                 इसलिए इस लेख को पढ़कर  आप भी एक बार अपने नाम पर गौर कीजिये और सोचिये कि आपका नाम कितना सुन्दर है और आपके लिए कितना इम्पोर्टेंट  है.