Sunday, March 10, 2013

apni bhasha par garv karen


  अपनी भाषा पर गर्व करें   

                                                       हमेशा से ही हमारे देश में अंग्रेजी भाषा को लेकर बबाल मचता रहा है. कोई कहता है कि अंग्रेजी अंग्रेजों की भाषा है और इस भाषा को बोलना अंग्रेजों की गुलामी करने जैसा है, तो कोई कहता है कि अंग्रेजी भाषा किसी भी देश में कम्युनिकेट करने का बेहतरीन साधन है. वैसे देखा जाये तो हर व्यक्ति अपनी आम बोलचाल  में कहीं  कहीं अंग्रेजी के शब्दों का इस्तेमाल करता है, तो अंग्रेजी अब सिर्फ अंग्रेजो की भाषा कहाँ  रही? अब तो यह हमारी भाषा का हिस्सा  बन गयी  है.
                                                         लेकिन अभी भी पूरी तरह से  अंग्रेजी बोल पाने वाले लोग  हीनभावना का शिकार हो जाते  है.मेरी एक सहेली को नौकरी के लिए हर तरह से एलिजिबल होने के बावजूद, नौकरी से हाथ धोना पड़ा क्योंकि वह अंग्रेजी नहीं बोल पाती थीउसने अंग्रेजी आने के कारण अपने आप को जी भर कर कोसा जबकि वह बहुत अच्छी हिंदी और पंजाबी बोलती है. उसकी इस बात पर मुझे कुछ दिन पहले का एक वाक्या याद आया.
                                                         कुछ दिन पहले मैं खाना खाने एक रेस्टोरेंट में गई. वहाँ दो विदेशी लड़कियां भी खाना खाने आयीं हुई थीहालाँकि खाने का मेन्यु अंग्रेजी में था,परन्तु फिर भी वे दोनों लड़कियां रेस्टोरेंट में लगी खाने की चीज़ों की तस्वीरों को देखकर उनके बारे मे समझने की नाकामयाब कोशिश कर रही थी. उनकी परेशानी भांप कर मैंने उनसे अंग्रेजी में  पूछा कि वे क्या खाना चाहती हैं तो पता चला कि वे अंग्रेजी भी ठीक से समझ नहीं पाती है. बड़ी टूटी फूटी अंग्रेजी और इशारों में उन्होंने बताया कि वे जापान से टूरिस्ट वीजा पर भारत आयीं  हैं और अच्छी तरह सिर्फ अपनी  मात्रभाषा यानि  जापानी ही बोल पाती हैं. परन्तु उनके चेहरे पर अंग्रेजी  जानने के कारण झेंप या बेचारगी का भाव नहीं था.
                                                            उनसे बात करके मन में ये ख़याल आया कि क्या अंग्रेजी सीखनी बहुत ज़रूरी है?  मानाअंग्रेजी एक अंतर्राष्ट्रीय भाषा है. अगर आप ये भाषा जानते है तो दुनिया में कहीं भी conversate करना आसान हो जाता है, परन्तु भारत में ये एक स्टेटस सिम्बल भी है. अगर आप अंग्रेजी में बात करते है तो पढ़ेलिखे समझे जाते है और यदि पढ़े-लिखे होने के बावजूद आप अंग्रेजी नहीं बोल पाते है तो वो सम्मान नहीं पाते जिसके आप हकदार है और अपना कांफिडेंस लूज़ कर जाते है.
                                                           बहुत से बच्चे नौकरी पाने की होड़ में सिर्फ इसलिए पीछे रह जाते हैं क्योंकि वे अंग्रेजी समझ, लिख और पढ़ तो लेते है किन्तु  बोल नहीं पाते और इसी  कारण  बात करने  में झिझकते  है. जर्मनफ्रेंच आदि की तरह अंग्रेजी भी एक विदेशी भाषा है, जिसे सीखना पड़ता है. माँ के पेट से कोई भी कुछ भी सीखकर नहीं आता. इसलिए क्यों  अंग्रेजी को भी स्टेटस सिम्बल के रूप में देख कर सिर्फ एक भाषा के तौर पर देखा जाए.
                                                          चूँकि अंग्रेजी एक ऐसी भाषा है जो सामान्यतः हर जगह बोली और समझी जाती है, तो क्यों इस भाषा को सीखते समय हम सिर्फ भाषा को ही याद करे  कि अंग्रेजों को. लेकिन साथ ही साथ गर्व से अपना सर ऊँचा रखे कि हम हिंदी, जोकि हमारी राष्ट्रभाषा है, उसे अच्छी तरह बोलपढ़, लिख और समझ सकते है.
                                                           अंग्रेजी भाषा सीखना आज के वक़्त की डिमांड है, परन्तु अगर कोई व्यक्ति ये भाषा नहीं बोल पाता, तो वह इस बात को लेकर हीनभावना पालने  की बजाय इसे इस तरह देखे कि ये एक विदेशी भाषा है जो मुझे सीखनी होगी तो वह निश्चित रूप से इसे सीख लेगा. अक्सर  अंग्रेजी बोल सकने वाले लोग खुद को अंग्रेजी बोलने वाले लोगों से कमतर समझते  हैं जोकि सही नहीं है. जो भाषा आप बोलते है, उस पर गर्व करें. विदेशों में ऐसे कितने लोग हैं जो हिंदी सीखना चाहते हैं
                                                         जब कोई विदेशी टूटी फूटी या गलत हिंदी में बात करता है तो हम हंस कर उसकी भाषा ठीक करने की कोशिश करते है पर कहीं भी उसके प्रति  अपने से कमतर होने का  भाव मन में नहीं लाते. लेकिन अगर कोई अंग्रेजी गलत बोलता है तो हमारा उसके प्रति नजरिया  अलग ही होता  है. जोकि गलत है.
                                                        भाषा अपनी भावनाओं को अभिव्यक्त करने का एक माध्यम हैहम जो भी भाषा बोले उस पर गर्व करें. हम अगर अंग्रेजी बोलना जानते है तो ये बहुत अच्छी बात है परन्तु अंग्रेजी बोल सकने वालों को हीनी नज़र से देखे और ही अपने से कमतर आंके, और अगर हम अंग्रेजी बोलना नहीं जानते तो इसे सीखने की कोशिश ज़रूर करें, ये कोई मुश्किल भाषा नहीं है.