Thursday, October 17, 2013

 ऐसा दिल्ली में क्यों नहीं ?  

दिल है मुश्किल जीना यहाँ, ज़रा हट के, ज़रा बच के, ये है बोम्बे मेरी जान। सी.आई.डी. फिल्म का ये गाना मुंबई जाते समय मेरे ज़हन में रहा था। लेकिन मुम्बई प्रवास के दौरान एक के बाद एक इतने वाकये मेरे सामने आये कि इन पंक्तियों का मतलब ही बदल गया। एअरपोर्ट से बाहर निकलते ही टैक्सी चालक अकलाक़ मिला जिसने मुनासिब पैसों में सारा दिन अपनी टैक्सी में बड़े प्यार से हमें पूरा शहर दिखाया। उसने बिना एक्स्ट्रा पैसे लिए तय जगहों से ज्यादा जगहे हमें दिखायीं। साथ ही गाइड की तरह हमें मुंबई की छोटी छोटी बातों के बारे  में बताया। हमे कई साईट सीन पर काफी देर लगी पर उसने उफ़ तक नहीं की। रात को होटल छोड़ते समय उसने हमसे टिप या एक्स्ट्रा पैसो की कोई मांग नहीं की।  दूसरे दिन हमें माटुंगा से सायन जाना था। हमने एक टैक्सी रोकी। टैक्सी चालक ने हमसे पूछा कि क्या आपको रास्ता पता है। जब हमने मना किया तो उसने हमे ले जाने से इंकार कर दिया। कारण पूछने पर उसने कहा कि मुझे भी रास्ता नहीं पता। बेकार आप मेरे साथ जाकर जगह खोजोगे और आपके फालतू पैसे और समय खर्च होगा। इसके बाद उसने खुद ही सामने से आती एक अन्य टैक्सी रोकी और हमें उसमे जाने को कहा। नियत जगह पर हम उतरे तो देखा बिल 43 रुपये का था। जब मैंने यूँही टैक्सी चालक से किराया पूछा तो उसने कहा चालीस रूपये। मैं हैरान थी क्योंकि दिल्ली में ऑटो चालक 43 रूपये का  बिल आने पर खुल्ले पैसे होने का बहाना  करके सीधे 45 या 50 रूपयेकी  मांग करते है। 40 रूपये का तो सवाल ही नहीं उठता। मैंने सोचा कि मुंबई के लोगों में इमानदारी और  कर्तव्यनिष्ठा ज्यादा होगी लेकिन हैरानी की बात ये थी कि मुंबई में जितने टैक्सी चालक मुझे मिले वे दूसरे राज्यों से मसलन उत्तर प्रदेश,हैदराबाद या अन्य राज्यों से थे। चाहते हुए भी मन मुंबई  के टैक्सी चालकों की तुलना दिल्ली के ऑटो/ टैक्सी चालकों से करने लगा। मुंबई में कहीं भी जाने के लिए ऑटो/ टैक्सी आराम से उपलब्ध है और टैक्सी वाले अमूमन कही जाने के लिए मना नहीं करते। मुंबई में मुझे एक भी टैक्सी वाला नहीं मिला जिसने मीटर से चलने से मना किया हो या मन मर्ज़ी के पैसे मांगे हो जबकि दिल्ली में काली पीली टैक्सी कम ही देखने को मिलती है और ऑटो वालो के नियत जगह पर जानेसे इंकार करने, मीटर से जाने और मन मर्ज़ी के पैसे मांगने के किस्से आम है। ऐसा क्यों है, क्या इस सवाल का कोई जवाब है।