ये मेरी लिखी कविताओं में से वो एक कविता है जो सदा मुझे परेशानियों पर जीत हासिल करते हुए जीवन में आगे बढने की प्रेरणा देती है.
जिंदगानी
चार दिन की जिंदगानी है,
फिर क्यों तेरी आखों में पानी है.
छुपा ले ज़माने से अपनी आँखों की नमी को,
लोग हँसेंगे , जब देखेंगे तेरी इस कमी को.
आंसुओं में मुस्कुराना सीख जा,
अपने दुखों को पलकों में छुपाना सीख जा.
मिला ले कदम ज़माने से
आगे निकल जा किसी भी बहाने से.
छू ले ऊँचाइयों को
और फिर टिका रह उन पर.
क्योंकि ये तू भी जानता है और मैं भी
ज़माना करता है सलाम चढ़ते सूरज को.
पारुल
जिंदगानी
चार दिन की जिंदगानी है,
फिर क्यों तेरी आखों में पानी है.
छुपा ले ज़माने से अपनी आँखों की नमी को,
लोग हँसेंगे , जब देखेंगे तेरी इस कमी को.
आंसुओं में मुस्कुराना सीख जा,
अपने दुखों को पलकों में छुपाना सीख जा.
मिला ले कदम ज़माने से
आगे निकल जा किसी भी बहाने से.
छू ले ऊँचाइयों को
और फिर टिका रह उन पर.
क्योंकि ये तू भी जानता है और मैं भी
ज़माना करता है सलाम चढ़ते सूरज को.
पारुल