सिंगापोर डायरी - पार्ट
6
सेंटोसा में भी शाकाहारी
खाने के ऑप्शंस बहुत कम थे। एक रेस्त्रां में वेज पिज़्ज़ा मिल रहा था, जिसे देख कर कुछ
राहत मिली। उस छोटे से रेस्त्रां में पिज़्ज़ा बहुत ही बड़े साइज़ का था और लकड़ी के बड़े
से गोल पट्टे पर रखा था जिसमे से रेस्त्रां मालिक बड़े बड़े स्लाइस काट कर दे रही थीं।
एक स्लाइस तक़रीबन 175 रूपये का था। साथ ही कोक भी थी जो एक 500 एमएल की बोतल 125 रूपये
की थी। सेंटोसा में बीच भी है। मैंने बीच पर जाने के लिए एक मुस्लिम दुकानदार से अंग्रेजी
में रास्ता पूछा तो उन्होंने बड़ी नम्रता से हिंदी में जवाब दिया। मैंने पूछा कि आपको
तो हिंदी आती है तो वे बोले हाँ, मैं दुबई से हूँ और मैं अपने जैसे लोगों से हिंदी
में बोलने की ही कोशिश करता हूँ। अगर कोई समझ जाता है तो मुझे अच्छा लगता है। पराये
देश में किसी के मुंह से अपनी भाषा सुनकर एक अपनापन सा महसूस हुआ। शाम को होटल लौटते
समय हम वहां के मशहूर मुस्तफा मॉल पर ही उतर गये।
माइक ने बताया था कि मुस्तफा मॉल जैसे यहाँ सभी मॉल्स का किंग है। इससे न जाने कितने लोगों की रोज़ी रोटी चलती है ये
मॉल साल में 365 दिन और 24 घंटे खुलता है।
इसके लिए यहाँ वर्कर्स तीन शिफ्ट्स में काम करते है। मुस्तफा मॉल वाकई में बहुत
बड़ा था। एक मॉल तो वहां पूरा ज़ेवरों का ही था। जब मैंने वहां बैठी एक मुस्लिम महिला
से पूछा तो उन्होंने बताया की ये सब ज़ेवर दुबई से आते है। वहां हर तरह का सामान उपलब्ध
था। रात हो रही थी तो डिनर के लिए फिर एक शाकाहारी रेस्त्रां खोजा। इस बार खोज खत्म
हुई 'कोमलास' पर। वहां पर साउथ इंडियन फ़ूड के साथ साथ छोले भठूरे भी थे। उनका मेन्यू
भी बड़ा मज़ेदार था। उसमे खाने की हर आइटम के बारे में ब्रीफिंग दी गयी थी। साथ ही उसमे
न्यूट्रिएंट्स की मात्रा के बारे में भी बताया गया था। मेरे बेटे ने अपने लिए छोले
भठूरे लिए। मज़े की बात थी कि उसकी प्लेट में एक ही भटूरा आया लेकिन भटूरा काफी बड़ा
था। कोमलास से हमारा होटल पास ही था लेकिन हम रास्ता भूल गए तभी रास्ते में एक सरदार
जी दिख गए। तो रास्ता उन्ही से पूछा। उनका अग्रेज़ी में रास्ता बताने का अंदाज़ बिलकुल
अंग्रेज़ो वाला ही था।
हमें नाश्ता होटल से
ही मिलता था। जिसमे वेज में ब्रेड, बटर,जैम, आलू टिक्की, जूस जैसी कुछ लिमिटिड ही आइटम्स
थी। और उनका स्वाद भी कोई खास नहीं था। आज हमें वहां का मशहूर थीम पार्क यूनिवर्सल
स्टूडियो जाना था। नियत समय पर माइक हमे लेने आ गया। यूनिवर्सल स्टूडियो में भी झूले और शोज ही थे। वहां जाकर मुझे कुछ खास नयापन नहीं लगा क्योंकि
वैसा सबकुछ हम भारत में पहले ही एडलैब्स इमेजिका
(मुंबई पुणे हाईवे ) थीम पार्क में देख चुके थे। उस पर उस दिन बुद्ध पूर्णिमा की छुट्टी
थी तो वहां पर गज़ब भीड़ थी। बुद्ध पूर्णिमा को सिंगापोर में वेसक डे के रूप में मनाया जाता है। यूनिवर्सल स्टूडियो में दो तरह के टिकट उपलब्ध थे।
एक नार्मल रेट पर थे और दूसरे थोड़ा महंगे वाले
थे। जो महंगे थे उनकी लाइन अलग थी जिसमे
जल्दी नंबर आ रहा था। इस बात का पता मुझे बाद
में चला। वहां अलग अलग देशो के हिसाब से अलग
अलग ज़ोन बने हुए थे जिसमे झूले और शोज थे।
जब खाने की बारी आई तो पता चला कि वेज खाना सिर्फ इजिप्ट में ओएसिस नाम के रेस्त्रां
में ही मिलेगा। वहां पहुंचे तो वेज में सिर्फ
थाली ही थी जिसकी कीमत 700 रूपये थी। उस रेस्त्रां ने मदर्स डे के उपलक्ष्य में स्कीम
निकाली हुई थी जिसमे तीन थाली लेने पर चौथी थाली मुफ्त थी। उस दिन उस स्कीम का आखिरी दिन था। हमने भी चार थाली ले ली। थाली में सिर्फ चावल, हलके
कच्चे छोले और आलू गोभी की बेस्वाद सब्जी और साथ में खीर थी। यूनिवर्सल स्टूडियो में
एक बात बड़ी मज़ेदार थी। वहां उनके कुछ लोग अलग अलग गेटअप (जैसे मडोना, शिकारी बेबी डॉल) में घूम रहे थे। उनके साथ फोटो खिंचवाने में बड़ा मज़ा आ रहा था। इस तरह पूरे दिन एन्जॉय करके शाम को हम होटल लौट
आये।
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